मध्यप्रदेश में दुग्ध सहकारिता के माध्यम से बढ़ेगी किसानों की आय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

By Vinay Pratap Yadav Apr 8, 2025

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सहकार से समृद्धि के विजन के अंतर्गत मध्यप्रदेश एक महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, एमपी स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) के मध्य सहकार्यता अनुबंध (कोलेबोरेशन एग्रीमेंट) के माध्यम से किसानों और पशुपालकों की जिंदगी बदलने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दुग्ध सहकारिता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने विशेष स्थान बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मंत्रालय में संपन्न बैठक में यह बात कही।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में आगामी 13 अप्रैल को भोपाल में हो रहे राज्य स्तरीय सहकारी दुग्ध उत्पादक गोपाल सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की। कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता और गृहमंत्री श्री अमित शाह का आगमन प्रस्तावित है। बैठक में डेयरी विकास एवं पशुपालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

श्वेत क्रांति की दिशा में बढ़ता मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को दुग्ध उतपादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार संकल्पित है कि किसानों और पशुपालकों से दूध की खरीद सुनिश्चित हो और उन्हें दूध की सही कीमत प्राप्त हो। श्वेत क्रांति मिशन के अंतर्गत प्रत्येक जिले में सांची डेयरी के साथ मिल्क कूलर, मिनी डेयरी प्लांट, चिलिंग सेंटर की संख्या बढ़ाकर और दुग्ध संघों की प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार कर किसानों की आय में वृद्धि का कार्य किया जाएगा। प्रदेश में अधिकतर ग्रामों में दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना कर दुग्ध उत्पादक किसानों को सहकारी डेयरी कार्यक्रम से जोड़ने का कार्य होगा। प्रदेश का दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरा स्थान है। सहकारी समितियों को कव्हरेज बढ़ाकर दुग्ध उत्पादकों को सहकारी डेयरी कार्यक्रम का पूरा-पूरा लाभ दिलवाया जाएगा। सांची ब्रांड के उन्नयन का भी यह ठोस प्रयास है।

स्थापित होंगे नए अत्याधुनिक संयंत्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अत्याधुनिक संयंत्र भी स्थापित होंगे। जहां दुग्ध संघों के संयंत्र पुराने हो गए हैं वहां नए अत्याधुनिक संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। प्र-संस्करण क्षमता 18 लाख लीटर प्रतिदिन से 30 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से दुग्ध उत्पादक संस्थाएं भी सुदृढ़ होंगी। किसानों को किसानी के अलावा आमदनी का नया महत्वपूर्ण स्रोत उपलब्ध होगा, जो प्रदेश की प्रगति में भी सहायक होगा।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *